khushi ki बूंदें

बूँद या फ़िर बूँदों का कहना है

“हम कई सारे युवा साथी; अलग अलग चेहरे मोहरे और नाम वाले ;लेकिन जाति और धर्म एक है; इंसानियत; हम एस दुनिया को एक घर बनाने निकले हैं; जहां हम में से हर एक घर का परिवार का सदस्य हो; कोई छोटा बड़ा न हो; भेदभाव न हो; सब एक दूसरे के लिए खड़े रहें…..देखना एक दिन हम बूंदें मिल कर सागर बनाएंगे; लाज़िम है कि हम भी देखेंगे…”

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: Bharat Tiwari

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